Rajesh Kumar Yadav

भ्रम आंखों में पाले


मैं मिट्टी गूंद कर ये सोचता हूं
कि मुझमें फन आ गया जादूगरी का
मैं एक ही सतह पर ठहरूंगा कैसे उतरता चढ़ता पानी हूं नदी का
समंदर खाली हो गया जिसकी आंखों का
वह कैसे ख्वाब देखे किसी जलपरी का
निकालो कील को दीवार में से
वरना टांग लो फोटो किसी जलपरी का
ग़मों से भरी जिंदगी जी रहे है
भ्रम आंखों में पाले खुशी का
राजेश कुमार यादव

#अन्य